शुक्रवार, 26 जून 2009

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सच है तुम्हारे बिना जिंदगी अपंग है
लेकिन ! क्यों लगता है मुझे
प्रेम
अकेले होने का ही
एक और ढंग है ...
श्रीकांत वर्मा

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