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अपना ब्लॉग
हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती. . .
मंगलवार, 30 जून 2009
खामोशी
के
झील
किनारे
,
शायद
बैठे
मिल
जायें
एहसासों
के
पाक
फरिश्तें
, लफ़्जों
में
कम
मिलते
हैं
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खामोशी के झील किनारे , शायद बैठे मिल जायें एहसासों...
मैं कविताएँ लोगों के हाथ में देखना चाहता हूँमैं चा...
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मेरे बारे में
sandeep
JNU, वैसे हूँ बिहार से . . ., India
अब खुद से क्या कहूँ . . .
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