सोमवार, 29 जून 2009

मैं कविताएँ लोगों के हाथ में देखना चाहता हूँ
मैं चाहता हूँ देखना
कविता में हाथों की छाप
कविता एक रोटी के मानिंद हो
कि हम उसे खा सके ....पाब्लो नेरुदा

3 टिप्‍पणियां:

  1. कविता का जीवन की गहमा गहमी से जटिल सम्बन्ध होता है .
    नेरुदा की ये पंक्तियाँ मुझे बहुत ही अच्छी लगीं ..
    ..इसके लिए धन्यवाद

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  2. ये छोटी-छोटी सी पंक्तियां क्या गज़ब ढा़ रही हैं।

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