मैं कविताएँ लोगों के हाथ में देखना चाहता हूँ
मैं चाहता हूँ देखना
कविता में हाथों की छाप
कविता एक रोटी के मानिंद हो
कि हम उसे खा सके ....पाब्लो नेरुदा
सोमवार, 29 जून 2009
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हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती. . .
कविता का जीवन की गहमा गहमी से जटिल सम्बन्ध होता है .
जवाब देंहटाएंनेरुदा की ये पंक्तियाँ मुझे बहुत ही अच्छी लगीं ..
..इसके लिए धन्यवाद
ये छोटी-छोटी सी पंक्तियां क्या गज़ब ढा़ रही हैं।
जवाब देंहटाएंbah chirkut acchi nakal mar lete ho?
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